जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में जोधपुर अग्निकांड के घायलों से मिलने पहुंचे गहलोत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और राजस्थान निकाय चुनावों में पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग पर कड़ा रोष जताया।
‘देश का दुर्भाग्य… दो कमिश्नरों की आपत्ति भी नहीं सुनी’
केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा:
“यह देश का बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव आयोग के दो कमिश्नर SIR के मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखित आपत्तियां देते हैं, लेकिन वे कोई सुनवाई तक नहीं करते। ऐसे में उन्हें अपने पद पर एक मिनट भी बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।”
गहलोत ने आगे कहा:
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वोटर लिस्ट में हेरफेर: उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से गंभीर छेड़छाड़ की गई और उसी आधार पर बिहार व बंगाल में चुनाव कराए गए। देश इस कृत्य को कभी माफ नहीं करेगा।
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मतदान के अधिकार पर प्रहार: जो नागरिक बीते 10-15 बार से मतदान कर रहा है, उसका नाम अचानक मतदाता सूची से काटकर उसे मताधिकार से वंचित कर दिया गया। गरीब और सामान्य वर्ग के लिए वोट देना उसके आत्मसम्मान की बात होती है, जिसे छीना गया है।
‘निकाय चुनाव में गुंडागर्दी और दबंगता की सारी हदें पार’
राजस्थान के हालिया निकाय चुनावों की कार्यप्रणाली पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा:
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विपक्ष और आमजन पर दबाव: मकान गिराने, घर पहुंचकर धमकाने, नोटिस थमाने और थाने बुलाकर प्रताड़ित करने जैसी कार्रवाइयां खुलेआम हुईं।
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अंदरखाने असंतोष: गहलोत ने दावा किया कि चाहे कोई बीजेपी का हो, आरएसएस का हो या कांग्रेस का, व्यक्तिगत तौर पर सभी स्वीकार करते हैं कि पहले कभी ऐसे हालात नहीं बने। भाजपा नेता खुलकर नहीं बोल पा रहे, लेकिन वे भी इस कार्यशैली से असहज हैं।
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हाईकोर्ट की आधी रात को सुनवाई: उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट को रात 2 बजे सुनवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि चुनावों में किस तरह उत्तर प्रदेश और राजस्थान (भजनलाल सरकार) पुलिस का दुरुपयोग किया गया।
