पाली। नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर और दिल दहला देने वाले मामले में पाली की विशेष पॉक्सो अदालत संख्या 3 ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत के पीठासीन अधिकारी (जज) निहालचंद ने मामले में दोनों पक्षों की बहस, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
काम दिलाने के बहाने बाइक पर बैठाया, सुनसान जगह ले जाकर की दरिंदगी
विशिष्ट लोक अभियोजक (पॉक्सो कोर्ट संख्या 3) कुलदीपसिंह सोनगरा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता के परिजनों ने 7 मई 2025 को संबंधित पुलिस थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
परिजनों ने रिपोर्ट में बताया था कि घटना से चार दिन पहले उनकी नाबालिग बेटी रोजाना की तरह मजदूरी के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसे 36 वर्षीय परिचित आरोपी मिला। आरोपी ने किशोरी को अच्छा काम दिलाने का झांसा दिया और विश्वास में लेकर अपनी बाइक पर बैठा लिया। इसके बाद वह पीड़िता को किसी अनजान व सुनसान इलाके में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ जबरन दुष्कर्म किया।
रातभर बंधक बनाकर मारपीट की, जान से मारने की दी धमकी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दरिंदगी करने के बाद आरोपी ने नाबालिग को पूरी रात बंधक बनाए रखा। जब पीड़िता ने वहां से भागने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और किसी को भी घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।
अगले दिन किसी तरह चंगुल से छूटकर पीड़िता अपने घर पहुंची और रोते हुए परिजनों को आपबीती बताई। इसके बाद परिजन पीड़िता को लेकर तुरंत पुलिस थाने पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अदालत का फैसला
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और बंधक बनाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को तत्परता से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच कर अदालत में चालान पेश किया, जिसके बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
28 सितंबर 2026 को मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए पॉक्सो कोर्ट संख्या 3 के जज निहालचंद ने फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए मेडिकल साक्ष्य, गवाहों के बयान और पीड़िता की गवाही को पुख्ता मानते हुए 36 वर्षीय दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा से दंडित किया।
