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सुमेरपुर। मानसून पूर्व आई पहली तेज आंधी ने सुमेरपुर शहर की बिजली व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। शनिवार शाम चली तेज आंधी और तूफान के बाद शहर के आधे से अधिक हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जो रविवार देर रात  तक भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी। कई कॉलोनियों के लोगों को 48 घंटे से अधिक समय तक बिना बिजली के रात और दिन गुजारने पड़े।

आंधी के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के खंभे उखड़ गए, तार टूट गए और कई स्थानों पर पेड़ गिरने से आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। उषापुरी गेट, नहर क्षेत्र, खेड़ा देवी, भेरू चौक सहित कई इलाकों में बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा, जबकि जवाई बांध रोड पर कई बड़े नीम के पेड़ धराशायी होने की सूचना मिली।

बिजली नहीं, जनजीवन भी हुआ ठप

लगातार बिजली गुल रहने से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए। व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ, वहीं ऑनलाइन काम करने वाले युवाओं, विद्यार्थियों और निजी संस्थानों के कामकाज पर भी असर पड़ा।

कई लोगों ने बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर लगातार फोन और संदेश भेजे, लेकिन अधिकांश लोगों का आरोप है कि उन्हें संतोषजनक जवाब तक नहीं मिला। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

अगर पहली आंधी में यह हाल है तो मानसून में क्या होगा?

शहरवासियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मानसून से पहले आई एक आंधी ने सुमेरपुर को पूरे दिन अंधेरे में डुबो दिया, तो आगामी बारिश के महीनों में हालात कितने गंभीर हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश और आंधी के दौरान बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया।

रोजाना कटौती से भी परेशान जनता

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह समस्या केवल आंधी तक सीमित नहीं है। शहर में सामान्य दिनों में भी बार-बार बिजली कटौती होती रहती है। सुबह 7 बजे नियमित रूप से बिजली बंद कर दी जाती है और पानी सप्लाई का हवाला दिया जाता है, जबकि कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति अलग-अलग समय पर होती है।

लोगों का कहना है कि दिनभर कभी पेड़ गिरने, कभी तार टूटने और कभी रखरखाव के नाम पर बिजली काट दी जाती है, जिससे आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है।

ठेका व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

शहरवासियों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकांश कार्य अब ठेका प्रणाली से संचालित हो रहे हैं, जिसके कारण शिकायतों पर त्वरित सुनवाई नहीं होती। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारी तय नहीं होने से आम उपभोक्ता परेशान हो रहा है और समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता।

जवाबदेही तय हो, स्थायी समाधान की मांग

शहर के नागरिकों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले जर्जर बिजली लाइनों, कमजोर खंभों और जोखिम वाले पेड़ों का सर्वे कर आवश्यक कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में शहर को लंबे समय तक अंधेरे का सामना न करना पड़े।

सवाल यह है कि यदि मानसून की पहली तेज आंधी ही सुमेरपुर की बिजली व्यवस्था को 24 घंटे से अधिक समय तक ठप कर सकती है, तो आने वाले महीनों में शहरवासियों को कितनी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा? अब प्रशासन और बिजली विभाग को जवाब देना होगा।

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By Sumerpur News

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