c981e205 adaf 47e3 b3f7 3db3359581a2

जयपुर। मासूम बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक, अश्लील और शोषणकारी कंटेंट (CSEAM) के ऑनलाइन गोरखधंधे के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित अहम प्रेस वार्ता में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह और पुलिस अधीक्षक (साइबर क्राइम) सुमित मेहरड़ा ने इस राष्ट्रव्यापी डिजिटल क्रैकडाउन का खुलासा किया। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय खुफिया इनपुट और टेक्निकल डेटा एनालिसिस के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री फैलाने वाले एक बहुत बड़े गिरोह की कमर तोड़ दी है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था NCMEC की रिपोर्ट पर खुली पोल

एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी NCMEC (National Centre for Missing & Exploited Children) से प्राप्त टिपलाइन रिपोर्ट्स और करीब 25,000 से अधिक गोपनीय डिजिटल इनपुट्स का साइबर सेल ने गहनता से विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि इंटरनेट की आड़ में अपराधी टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट पर गुप्त (Secret) और पेड ग्रुप चला रहे थे। इन ग्रुप्स में कोडेड हैशटैग्स और क्लाउड स्टोरेज लिंक्स के जरिए मासूम बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें बेची और शेयर की जा रही थीं।

आंकड़ों में पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक

  • 15,326 मोबाइल नंबर ब्लॉक: आपराधिक गतिविधियों और बाल यौन शोषण सामग्री के आदान-प्रदान में लिप्त हजारों मोबाइल नंबरों को दूरसंचार विभाग के जरिए तत्काल बंद कराया गया।

  • 7,800 से अधिक URLs और प्रोफाइल्स बैन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट होस्ट करने वाले पेजों, प्रोफाइल्स और वेब लिंक्स को डिजिटल स्पेस से हटाया गया।

  • 100 से अधिक डिजिटल डिवाइसेज पर पाबंदी: अपराध में लगातार प्रयुक्त हो रहे मोबाइल फोन्स और टूल्स को तकनीकी रूप से लॉक/ब्लॉक किया गया।

  • 7 जिलों में दर्ज हुईं एफआईआर: लगातार यह कृत्य करने वाले शातिर (Repeated Offenders) को चिन्हित कर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ के विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

गलतफहमी में न रहें: देखना, रखना और शेयर करना भी गैर-जमानती जुर्म

एडीजी वी.के. सिंह ने दो-टूक शब्दों में जनता को आगाह किया कि इंटरनेट पर बच्चों से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट केवल बनाना ही नहीं, बल्कि उसे देखना (Watch), डाउनलोड करना, अपने फोन में रखना (Possession) या किसी अन्य व्यक्ति को फॉरवर्ड करना भी कानूनन गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाने पर POCSO एक्ट, IT एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गैर-जमानती धाराओं में सीधी गिरफ्तारी, जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

अगर आपका नंबर गलती से ब्लॉक हुआ है तो क्या करें?

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के तहत की गई इस व्यापक कार्रवाई में यदि किसी निर्दोष नागरिक का मोबाइल नंबर इस सूची में आने के कारण ब्लॉक हो गया है, तो वे घबराएं नहीं। वे अपना पक्ष रखने और नंबर अनब्लॉक कराने के लिए आधिकारिक ई-मेल sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर अपना विवरण भेजकर अनुरोध कर सकते हैं। सत्यापन के बाद वैध मामलों में राहत दी जाएगी।

सतर्क रहें और यहां करें शिकायत

साइबर विंग ने प्रदेशवासियों और अभिभावकों से अपील की है कि इंटरनेट पर यदि किसी भी प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट नजर आए, तो उसे कतई अनदेखा या फॉरवर्ड न करें। इसकी सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें या केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।

About The Author

Avatar

By Sumerpur News

विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती हुई सुमेरपुर न्यूज़ राष्ट्रीय हिंदी समाचार वेबसाइट है, जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रामाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने समर्पित पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। यह अन्य भाषाई साइटों की तुलना में अधिक विविधतापूर्ण मल्टीमीडिया कंटेंट उपलब्ध कराती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!