सुमेरपुर में चल रहे “स्वस्थ भारत अभियान” के तहत नगर पालिका और जयपुर से आई निरीक्षण टीम बुधवार को शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लेने निकली, लेकिन देव नगरी कुम्हारों का वास क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान माहौल अचानक गरमा गया। स्थानीय लोगों और वार्ड पार्षद ने टीम पर जमकर नाराजगी जताई और निरीक्षण को दिखावा बताते हुए सवाल खड़े कर दिए।

“पहले सीवरेज साफ करवाओ, फिर निरीक्षण करना”

निरीक्षण के दौरान वार्ड पार्षद फुलाराम सुथार टीम पर भड़क गए। उन्होंने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ खानापूर्ति और फोटो खिंचवाने से शहर साफ नहीं होगा। पार्षद ने आरोप लगाया कि वार्ड में लंबे समय से सीवरेज जाम है, नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं और बदबू के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो चुका है। कई बार शिकायतें देने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि जब मोहल्लों में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, नाले जाम पड़े हैं और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, तब सिर्फ निरीक्षण करने और फोटो खिंचवाने का कोई मतलब नहीं है।

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स्थानीय लोगों का भी फूटा गुस्सा

वार्ड पार्षद के विरोध के बाद स्थानीय निवासी भी निरीक्षण टीम के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। लोगों ने टीम को गलियों में आगे बढ़ने से रोक दिया और कहा कि अधिकारी केवल साफ-सुथरी जगहों पर जाकर तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन जहां असली समस्या है वहां कोई ध्यान नहीं देता।

स्थानीय लोगों का आरोप था कि जयपुर से आई टीम और नगर पालिका कर्मचारी उन्हीं गलियों में गए जहां पहले से सफाई थी। वहां लोगों के घरों के बाहर खड़े होकर फोटो लिए गए, ताकि रिकॉर्ड में सब कुछ बेहतर दिखाया जा सके।

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“जनता की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं”

क्षेत्रवासियों ने कहा कि मोहल्ले में सीवरेज का गंदा पानी कई दिनों से जमा है। बरसात से पहले हालात और बिगड़ने का डर बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और निरीक्षण तक सीमित हैं। लोगों का कहना था कि सफाई व्यवस्था की असल तस्वीर देखने के बजाय अधिकारी केवल अभियान की रिपोर्ट चमकाने में लगे हैं।

प्रशासन पर उठे सवाल

घटना के बाद नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि शहर में कई जगह गंदगी, जाम नालियां और सीवरेज की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान के बजाय केवल निरीक्षण और औपचारिकता की जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अभियान को सिर्फ फोटो और रिपोर्ट तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था में सुधार किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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