कांग्रेस की पारस देवी माली और निर्दलीय रमिला गहलोत ने बढ़ाई मुश्किलें, वार्ड में त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा; डोर-टू-डोर प्रचार में जुटे प्रत्याशी
सुमेरपुर। नगर निकाय चुनाव में सुमेरपुर का वार्ड संख्या 22 इस बार सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में शामिल हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का निवास वाला वार्ड है। मंत्री कुमावत का राजनीतिक सफर भी इसी क्षेत्र से शुरू हुआ और स्थानीय राजनीति से लेकर कैबिनेट मंत्री तक उनका सफर पहुंचा है। ऐसे में इस वार्ड का परिणाम भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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Toggleवार्ड में इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं है। निर्दलीय प्रत्याशी रमिला गहलोत की सक्रिय मौजूदगी ने चुनावी समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है। यही वजह है कि वार्ड में हर प्रत्याशी अपने-अपने सामाजिक और व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर समर्थन जुटाने में लगा है।
मंत्री के वार्ड में भाजपा के सामने प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती
वार्ड 22 को लंबे समय से मंत्री जोराराम कुमावत के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी के सामने यहां जीत दर्ज करने की चुनौती सामान्य वार्डों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा कार्यकर्ता लगातार डोर-टू-डोर जनसंपर्क कर रहे हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी की ओर से मंत्री के प्रभाव और संगठन की ताकत को भी चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी भी लगातार जनसंपर्क कर भाजपा के मजबूत माने जाने वाले वार्ड में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस ने पारस देवी माली पर जताया भरोसा
कांग्रेस ने वार्ड 22 से पारस देवी माली को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके समर्थकों के अनुसार उनका संबंध माली समाज और स्वतंत्रता सेनानी परिवार से है। कांग्रेस इस सामाजिक जुड़ाव को वार्ड में अपने पक्ष का महत्वपूर्ण आधार मान रही है।
पारस देवी माली के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर संपर्क कर रहे हैं। पार्टी समर्थकों का दावा है कि वार्ड में कांग्रेस को अच्छा समर्थन मिल रहा है और मुकाबला भाजपा के लिए आसान नहीं है।
रमिला गहलोत ने बिगाड़ा दोनों दलों का गणित
वार्ड 22 में निर्दलीय प्रत्याशी रमिला गहलोत की सक्रियता ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। उन्हें शिक्षित और ऊर्जावान प्रत्याशी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उनका जनसंपर्क और लोगों के बीच सक्रियता चर्चा में है।
स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों का दावा है कि उन्हें विभिन्न समाजों से समर्थन मिल रहा है। हालांकि इन दावों की वास्तविक स्थिति मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।
निर्दलीय प्रत्याशी की मजबूत मौजूदगी का सबसे बड़ा असर यह हो सकता है कि भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में सेंध लगे और मुकाबला बेहद करीबी हो जाए।

वार्ड में कौन आगे? अलग-अलग दावे
वार्ड 22 में चुनावी माहौल ऐसा है कि हर खेमे की अपनी जीत की गणित है। कुछ स्थानीय लोगों के बीच कांग्रेस और निर्दलीय के बीच मुख्य मुकाबले की चर्चा है, जबकि भाजपा समर्थक अपने संगठन और मंत्री के प्रभाव के आधार पर जीत का दावा कर रहे हैं।
यही विरोधाभासी दावे वार्ड 22 को सुमेरपुर की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल कर रहे हैं।
चुनाव परिणाम देगा सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश
वार्ड 22 का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का निवास वाला वार्ड है। भाजपा के लिए यहां जीत पार्टी के स्थानीय संगठन और मंत्री के प्रभाव की मजबूती का संदेश देगी, जबकि कांग्रेस या निर्दलीय प्रत्याशी की जीत को भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में बड़ा उलटफेर माना जाएगा।
फिलहाल तीनों प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। किसके पक्ष में वार्ड का मतदाता अपना फैसला सुनाता है, यह मतदान और मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
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