सुमेरपुर/पाली: मारवाड़ के गौरव, अरावली की प्राचीन ग्रेनाइट चट्टानों और जवाई की पावन धरा के इतिहास को सहेजने की दिशा में एक बड़ा साहित्यिक कदम उठाया गया है। क्षेत्र के प्राकृतिक, व्यापारिक और सामाजिक इतिहास पर आधारित बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘Jawai: The Untold Story’ (The History, Mystery and Modern Era) नए साल के अवसर पर 01 जनवरी 2027 को भव्य रूप से लॉन्च की जाएगी। सांखला डिजिटल हब द्वारा प्रस्तुत की जा रही यह पुस्तक क्षेत्र के उन अनछुए अध्यायों को सामने लाएगी, जो अब तक आम जनमानस की नज़रों से ओझल रहे हैं।

1. इंसान और लेपर्ड्स का अटूट रिश्ता: जवाई का अनोखा रहस्य
पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा जवाई के विश्वप्रसिद्ध लेपर्ड्स (तेंदुओं) के रहस्यमयी जीवन और यहाँ के ग्रामीणों के आपसी प्रेम पर केंद्रित है। दुनिया भर में जहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की खबरें आती हैं, वहीं जवाई की पावन पहाड़ियों में रबारी समुदाय और स्थानीय ग्रामीणों के साथ तेंदुए सदियों से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहते आए हैं। पहाड़ी गुफाओं, प्राचीन मंदिरों की चौखटों पर लेपर्ड्स की मौजूदगी और बिना किसी भय के इंसानों के साथ उनका यह तालमेल आज भी दुनिया के शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा रहस्य है।
2. सुमेरपुर शहर की स्थापना और ऐतिहासिक कृषि मंडी का सफर
पुस्तक में सुमेरपुर शहर के उदय और इसके पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र बनने की गाथा दर्ज है:
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शहर की नींव: महाराजा सुमेर सिंह जी के दौर में बसे इस शहर ने किस तरह अपनी आधुनिक पहचान बनाई।
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व्यापार की धड़कन (सुमेरपुर मंडी): सुमेरपुर की प्रसिद्ध कृषि उपज मंडी (अनाज, तिलहन, कपास व जिंसों का व्यापार) का ऐतिहासिक सफर, जिसने पूरे मारवाड़ और गोडवाड़ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी।
3. 36 कौमों का सामाजिक ताना-बाना और जवाई बांध की पावन गाथा
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अनेकों समाजों की साझी विरासत: सुमेरपुर और जवाई क्षेत्र को समृद्ध बनाने में यहाँ की 36 कौमों—रबारी, सीरवी, देवासी, जैन, महाजन, राजपूत, मेघवाल, चौधरी और अन्य सभी समाजों के योगदान, परंपराओं व लोक-संस्कृति को पहली बार इतने व्यवस्थित रूप से दर्ज किया गया है।
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अमृत सरोवर ‘जवाई बांध’: मारवाड़ की जीवनरेखा माने जाने वाले जवाई बांध के निर्माण के संघर्ष, इसके पीछे के ऐतिहासिक विज़न और डूब क्षेत्र में आए गांवों की पावन कुर्बानियों की अनसुनी दास्तान भी इस पुस्तक का मुख्य आकर्षण है।
लेखक का नाम रखा गया है गोपनीय
पब्लिकेशन हाउस की ओर से जानकारी दी गई है कि इस गहन शोध आधारित पुस्तक के लेखक का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेखक की पहचान को रहस्य रखा गया है, जिसका खुलासा विमोचन के ठीक पहले एक विशेष कार्यक्रम में किया जाएगा।

इतिहास प्रेमियों और युवाओं में जबरदस्त उत्साह
स्थानीय प्रबुद्धजनों, इतिहासकारों और युवाओं का कहना है कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी माटी की जड़ों को समझने का एक प्रामाणिक दस्तावेज बनेगी। 01 जनवरी 2027 को होने वाले विमोचन को लेकर क्षेत्र में अभी से उत्सुकता का माहौल है।
